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सहजन वृक्ष के आयुर्वेद मे लाभ

प्रिय मित्रों जय श्रीकृष्णा, राधे राधे....

सहजन वृक्ष के आयुर्वेद मे लाभ

       परिचय : 

              सहजन के पेड़ अधिकतर हिमालय के तराई वाले जंगलों में ज्यादा पायें जाते हैं। सहजन के पेड़ छोटे या मध्यम आकार के होते हैं। इसकी छाल और लकड़ी कोमल होती है। सहजन के पेड़ की टहनी बहुत ही नाजुक होती है जो बहुत जल्दी टूट जाती है। इसके पत्ते 6-9 जोड़े में होते हैं। फलियां 6-18 इंच लम्बी 6 शिराओं से युक्त और धूसर होती हैं। सहजन के पेड़ तीन प्रकार के होते हैं जिन पर लाल, काले और सफेद फूल खिलते हैं। लाल रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी खाने में मीठी और सफेद रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी कटु होती है। तासीर : सहजन का स्वभाव गर्म होता है। 



सहजन वृक्ष के आयुर्वेद मे लाभ

       विभिन्न भाषाओं में सहजन के नाम : 

               हिन्दी सहजन। संस्कृत शोभानजना। अंग्रेजी Horse radish tree, Drum stick plant. राजस्थान सेनणा, सहजन। पंजाबी शुभांजना। बंगाली सजीना। तेलगु शोरगी। मराठी शोरगी। 

सहजन वृक्ष के आयुर्वेद मे लाभ



     गुण : 

              सहजन का प्रयोग दर्द निवारक दवा बनाने में किया जाता है। इसके फूल और फलियों की सब्जी बनाकर खाते हैं। सहजन की पत्तियों में विटामिन `ए` व `सी` कैरोटिन और एस्कॉर्बिक एसिड के रूप में बहुत मिलता है। इसकी 100 ग्राम पत्तियों में लगभग 7 ग्राम कैरोटिन होता है, जिसे हमारा शरीर विटामिन `ए` में बदल देता है, जो आंखों के रोगों के लिए जरूरी होता है। इसकी मुलायम हरी पत्तियों की सब्जी बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसकी पत्तियों को दूसरी सब्जी के साथ मिलाकर भी पका सकते हैं। इसकी सब्जी खाने की ओर कम लोगों का ध्यान जाता है, लेकिन इसके गुण देखते हुए इसकी सब्जी अधिक खानी चाहिए। यह चटपटा, गर्म, मीठा, हल्का, जलन को शांत करता है, भूख को बढ़ाता है, बलगम को नष्ट करता है, वातनाशक, वीर्यवर्धक, फोड़े-फुंसी को खत्म करता है, गण्डमाला, गुल्म, प्लीहा तथा विद्रधि नाशक है तथा दस्त अधिक लाता है, सहजन के बीज आंखों के लिए लाभकारी तथा सिरदर्द दूर करने वाला है। इसकी शाखा की एक बहुत अच्छी खासियत है कि इसे जमीन में गाड़ दिया जाये तो इसका पेड़ उग जाता है। 

विभिन्न रोगों में सहायक : 

     1. बार-बार भूख लगना : 10 मिलीलीटर सहजन के पतों का रस, शहद में मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से बार-बार भूख लगने का रोग ठीक हो जाता है। सहजन के पत्तों का रस शहद के साथ मिला कर रोजाना। बार पीने से लीवर और प्लीहा (तिल्ली) से पैदा हुए रोग जैसे बार-बार भूख का लगना आदि रोग दूर हो जाते हैं। 

        2. कब्ज : सहजन के कोमल पतों का साग खाने से कब्ज दूर होकर शौच खुलकर आती है।

       3. मुंह के छाले : सहजन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से मुंह के छाले, पीड़ा आदि खत्म होती है।

       4. नपुंसकता : सहजन के फूलों को दूध में उबाल कर रोजाना रात को मिश्री मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।

           5. दांतों में कीडे़ और दर्द : दांतों में कीड़े लग जाने व तेज दर्द होने पर सहजन की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 या 3 बार कुल्ला करने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम रहता है। 

          6. पोथकी, रोहे : 25 मिलीलीटर सहजन का रस और 25 ग्राम असली शहद को किसी कांच की शीशी में मिलाकर रखें। रोजाना इस मिश्रण को सलाई से आंखों मे लगाने से अनेक प्रकार के आंखों के रोग समाप्त हो जाते हैं। 

           7. गर्भपात : सहजन की छाल तथा पुराने गुड़ को एक साथ पानी मे पका कर पीने से गर्भ गिर जाता है तथा झिल्ली आदि भी निकल जाती है। 

        8. कान का दर्द : सरसों के तेल में सहजन की जड़ की छाल का रस डालकर थोड़ा सा गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। सहजन के ताजे पत्तों का रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

         9. कान का बहना : सहजन के गोंद को पीसकर जरा सा कान में डालने से कान मे से मवाद बहना बंद हो जाता है। 

         10. कमजोरी : सहजन की जड़ की छाल, संतरे के छिलके और जायफल की मद्यसारायी रस की 10-15 बूंद सुबह-शाम सेवन करने से स्नायु की कमजोरी मिट जाती है। 

       11. पक्षाघात : संतरे की छाल, सहजन की जड़ की छाल तथा जायफल की मद्यसारीय रस की लगभग 10 से 15 बूंद रोजाना देने से पक्षाघात (लकवे) में बहुत लाभ मिलता है। 

       12. घाव में : सहजने की थोड़ी-सी पत्तियों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है। घाव की सूजन पर सहजन की छाल पीसकर लेप करे और 5 ग्राम से 10 ग्राम छाल पीसकर सुबह शाम पीते रहने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है। 

       13. भगन्दर : सहजने का काढ़ा बनाकर उस में हींग और सेंधा नमक डालकर पीने से भगन्दर के रोग मे लाभ होता है। सहजन के पेड़ की छाल का काढ़ा भी पीना भी भगन्दर रोग में लाभकारी होता है।

         14. गुर्दे की पथरी : सहजन की जड़ का काढ़ा बनाकर गुनगुना करके पीने से पथरी रोग ठीक होता है। सहजने की सब्जी बनाकर खाने से गुर्दे व मूत्राशय की पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है। सहजन तथा वरुण की छाल का काढ़ा बनाकर उस में लगभग आधा ग्राम यवक्षार को मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से पथरी जल्द घुलकर निकल जाती है।

         15. चोट-मोच : सहजन की छाल को पीसकर गर्म-गर्म लेप करने से चोट-मोच का दर्द कम होता है। 

        16. यकृत का बढ़ना : 4 से 8 मिलीलीटर सहजन के नये पेड़ की जड़ की छाल के काढ़े में सुबह-शाम हींग और सेंधा नमक के साथ मिलाकर सेवन करने से यकृत (जिगर) का बढ़ना रुक जाता है।

        17. जलोदर (पेट में पानी का भरना) : 4 से 8 मिलीलीटर सहजन के नए पेड़ की छाल के काढ़े में सैंधव और हींग मिलाकर पीने से जलोदर (पेट मे पानी भरना) के रोग में लाभ होता है। सहजन के पेड़ की छाल को गाय के पेशाब में पीसकर पेट पर लेप करने से पेट साफ हो जाता हैं।

        18. मोटापा होने पर : सहजन के पेड़ की पत्तियों का 3 चम्मच रस रोजाना सेवन करने से मोटापा धीरे-धीरे घटने लगता है। 

       19. पित्त पथरी में : सहजन की जड़ की छाल का काढ़ा और हींग को सेंधा नमक में मिलाकर सुबह-शाम खाने से पित्तपथरी में फायदा होता है। 

        20. अधिक नींद और ऊंघ आना : सहजन के बीज, सेंधा नमक, सरसों और कूठ को 3-3 ग्राम की मात्रा में बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को बकरी के मूत्र में घोंटकर रोगी को सूंघाने से नींद अधिक आने की बीमारी ठीक हो जाती है। 

       21. पेट के कीड़ों के लिए : सहजन के फलों की सब्जी को खाने से भूख बढ़ती हैं, यह प्लीहा (तिल्ली) और कीड़ों को समाप्त करता है। 

        22. प्लीहा वृद्धि (तिल्ली) : सहजन की जड़ को पीसकर उसमें काली मिर्च और जौ के खार को शहद में मिलाकर खिलाने से तिल्ली, जिगर तथा पेट का दर्द आदि ठीक हो जाता है। 

       23. आक्षेप कंपकंपाना : नाक में सहजन के बीजों से बने चूर्ण को डालने से आक्षेप से बेहोश व्यक्ति जल्दी होश में आ जाता है। 

       24. गठिया रोग - गठिया के दर्द में सहजन के जड़ की छाल और 2 से 4 ग्राम हींग एवं सैंधा नमक मिलाकर रोगी को देने से लाभ होता है साथ ही रोगी की भूख भी खुल जाती है तथा कमजोरी के कारण होने वाला दर्द भी दूर होता है। सहजन की ताजी छाल को पीसकर गर्म-गर्म दर्द वाले स्थान पर लेप करने से गठिया के रोगी को लाभ मिलता है। गठिया के रोगी के उपचार के लिये सहजन के बीजों की मालिश करने से रोगी का रोग जल्द खत्म होता है। 

        25. अन्दरुनी फोड़ा होने पर : 14 से 28 मिलीलीटर सहजन की छाल के काढ़े में लगभग 0.25 ग्राम असली हींग और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में 2 बार लेने से अन्दरुनी फोड़ा ठीक हो जाता है। 

       26. फोड़ा (सिर का फोड़ा) : सहजन की जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग के साथ खाने से फोड़े और दर्द में आराम मिलता है। 

        27. उच्च रक्तचाप : 15 ग्राम सहजन का रस सुबह और इतना ही रस शाम को पीने से उच्च रक्तचाप में बहुत लाभ होता है। 

          28. हाथ-पैरों की ऐंठन : हाथ-पैरों की ऐंठन में सहजने की जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाने से रोगी को आराम मिलता है। 

        29. गुल्यवायु हिस्टीरिया : सहजन की जड़ की छाल के काढ़े को हींग और सेंधा नमक के साथ मिलाकर खाने से हिस्टीरिया रोग में बहुत लाभ होता है। सहजन के जड़ की छाल को संतरे के छिलके एवं जायफल को मिलाकर बनाये गए रस की 10 से 15 बूंद रोजाना 3 बार देने से हिस्टीरिया रोग ठीक हो जाता है। 

       30. नहरूआ : सहजने की जड़ और पत्तों को सेंधा नमक के साथ पीसकर घाव पर लगाने से नहरूआ रोग खत्म हो जाता है।

         31. बेहोशी: सहजन और त्रिकटु के बीजों को अगस्त की जड़ के रस में घोट कर सूंघने से बेहोशी दूर हो जाती है। सहजन के बीजों के चूर्ण को नाक में डालने से बेहोशी खत्म हो जाती है। 

        32. चेहरे के लकवे में : सहजन के जड़ की छाल, संतरे का छिलका और जायफल का मद्यसारीय रस (एल्कोहोलिक टिनचर) 10 से 15 बूंद पानी में मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार पीने से चेहरे के लकवे मे लाभ होता है। 

        33. मिर्गी (अपस्मार) : लगभग 3.73 लीटर सहजन का रस, 930 मिलीलीटर नीम का रस, 3.73 लीटर गाय का पेशाब और 930 मिलीलीटर तेल को मिला लें। इस तेल की मालिश करने और सूंघने से मिर्गी के दौरे दूर हो जाते हैं। सहजन की छाल और पिसी हुई सरसों को गाय के पेशाब में मिलाकर शरीर पर लेप करने से मिर्गी रोग ठीक हो जाता है। लगभग 4-8 ग्राम सहजन की जड़ को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरे पड़ना बंद हो जाते हैं। 

         34. फोड़े-फुंसियों के लिए : फोड़ा चाहे जैसा भी हो वह न पकता हो और ना ही फूटता हो तो सहजने की सब्जी खाने को दें और इसके पत्तों का रस और जड़ की छाल का लेप बनाकर फोड़े पर बांध दें। इसकों बांधने से फोड़ा बैठ जाता है। 

          35. शरीर का सुन्न पड़ जाना : सहजने की छाल, करंज, दारूहल्दी तथा अमलतास की जड़ बराबर मात्रा में लेकर गाय के पेशाब में पीसकर लेप करने से शरीर का सुन्न होना सही हो जाता है। 

        36. बच्चो का पेट बड़ा होना : 1 चम्मच सहजन की छाल का रस और 1 चम्मच गाय के घी को एक साथ मिलाकर रोजाना एक बार बच्चों को पिलाने से सिर्फ 3 दिन में ही बच्चों का बढ़ा हुआ पेट ठीक हो जाता है। चम्मच सहजन की पत्ती का रस सिर्फ 3 दिन तक पिलाने से ही बच्चों का बढ़ा हुआ पेट ठीक हो जाता है।

        37. खून की कमी : सहजन की पत्तों को तोड़कर उसकी सब्जी बनाकर खाने से शरीर में लौह (आयरन) तत्व की कमी दूर होती है तथा शरीर में खून की कमी के कारण होने वाली बीमारी खत्म होती है। 

      38. सिर का दर्द : सहजन के पत्तों को पानी में पीसकर गर्म करके सिर पर लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। सिर में दर्द होने पर सहजन के बीजों को पानी में घिसकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। 

       39. शरीर में सूजन : लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सहजन की छाल, अमलतास की जड़, करंज, आक और दारुहल्दी को लेकर गाय के पेशाब के साथ पीसकर शरीर या बदन पर लेप करने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है। 

       40. पुराना गठिया : पुराना गठिया, पेट में वायु-संचय, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द आदि रोगों में सहजन की सब्जी खाना बहुत लाभदायक होता है। 

      41. शक्तिवर्धक : सहजन के फूल की सब्जी का सेवन करने से शरीर की शक्ति बढ़ती है। 

      42. रक्तरोग : सहजन के मुलायम पत्ते रक्त रोग में दिये जाते हैं। इसके पत्तों का रस बच्चों के दस्त एवं उल्टियां रोकने में व पेट के कीड़ों को भी निकालने के काम आता है। सहजन के तने की छाल उत्तेजक एवं रक्तातिसार अवरोधक है। खांसी, दमा, रोगों में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। 

        43. कमरदर्द : सहजन की फलियों की सब्जी खाने से कमर दर्द में लाभ होता है। 1-1 ग्राम सहजन का गोंद, अश्वगंधा, पीपल के फल, को लेकर उसमें 3 ग्राम सोंठ डालकर गाय के दूध में उबालकर सुबह-शाम पीने से ठण्डी हवा के कारण हुआ कमर के दर्द से राहत मिलता है। 

        44. ऊरूस्तम्भ : सहजन के बीजों के तेल की मालिश शरीर के पीड़ित भाग पर करने से पुराने से पुराना ऊरुस्तम्भ के अलावा गठिया (घुटनों का दर्द) और वातरोग भी ठीक हो जाते हैं।


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